योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

क्योंकि मिथ्या पर विशेषाधिकार जताना निरी मूर्खता है-मूर्खता के सिवा कुछ नहीं। इसी मूर्खता के फलस्वरूप हमारा देश गुलाम बना और जिस धर्म पर हम इतना गर्व करते हैं, वह भी गुलाम बना।

बुद्विमता की बात अब यह देखना है कि हमारे हज़ारों साल के इतिहास में वेदान्त का व्यावहारिक रूप क्या रहा और उससे हमंे जो कुछ विरासत में मिला उसमें सार तत्व क्या है, असार क्या है, छिलका क्या है जिसे हमें फेंकना है और

155 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द


769 of 1197

क्योंकि मिथ्या पर विशेषाधिकार जताना निरी मूर्खता है-मूर्खता के सिवा कुछ नहीं। इसी मूर्खता के फलस्वरूप हमारा देश गुलाम बना और जिस धर्म पर हम इतना गर्व करते हैं, वह भी गुलाम बना।

बुद्विमता की बात अब यह देखना है कि हमारे हज़ारों साल के इतिहास में वेदान्त का व्यावहारिक रूप क्या रहा और उससे हमंे जो कुछ विरासत में मिला उसमें सार तत्व क्या है, असार क्या है, छिलका क्या है जिसे हमें फेंकना है और

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