ज्ञान अब तक अर्जित किया था। वह अपने इस सुयोग्य पुत्र को सौंप दिया।
उनके घर में हर रोज़ रायपुर के गुण-ज्ञानी व्यक्तियों का जगघट होता था।
23 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
साहित्य, दर्शन आदि विभिन्न विषयों पर चर्चा चलती थी। घंटों वाद-विवाद होता और सूक्ष्म विवेचन किया जाता था। उस समय प्रायः नरेन्द्र भी वहीं उपस्थित होता और वाद-विवाद ध्यान से सुना करता था। कभी-कभी विश्वनाथ नरेन्द्र से भी किसी विषय पर उसकी राय पूछ लेते और
ज्ञान अब तक अर्जित किया था। वह अपने इस सुयोग्य पुत्र को सौंप दिया।
उनके घर में हर रोज़ रायपुर के गुण-ज्ञानी व्यक्तियों का जगघट होता था।
23 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
साहित्य, दर्शन आदि विभिन्न विषयों पर चर्चा चलती थी। घंटों वाद-विवाद होता और सूक्ष्म विवेचन किया जाता था। उस समय प्रायः नरेन्द्र भी वहीं उपस्थित होता और वाद-विवाद ध्यान से सुना करता था। कभी-कभी विश्वनाथ नरेन्द्र से भी किसी विषय पर उसकी राय पूछ लेते और