योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

यों उसे विवाद में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते थे। नरेन्द्र उम्र में चाहे छोटा था, पर उसके विचार इतने साफ-सुथरे और सुलझे हुए थे कि सुनकर बड़े-बूढे़ भी आनन्द से झूम उठते थे।

विश्वनाथ के मित्रों में एक सज्जन बंग-साहित्य के प्रसिद्व लेखक थे। एक दिन जब वे साहित्य पर वाद-विवाद कर रहे थे तो उसमें भाग लेने के लिए नरेन्द्र को भी बुला लिया गया। बस, अब क्या था, नरेन्द्र ने थोड़े ही समय में यह सिद्व कर दिखाया कि उसने अधिकांश लेखकों की पुस्तकें न सिर्फ पढ़ ली हैं,


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यों उसे विवाद में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते थे। नरेन्द्र उम्र में चाहे छोटा था, पर उसके विचार इतने साफ-सुथरे और सुलझे हुए थे कि सुनकर बड़े-बूढे़ भी आनन्द से झूम उठते थे।

विश्वनाथ के मित्रों में एक सज्जन बंग-साहित्य के प्रसिद्व लेखक थे। एक दिन जब वे साहित्य पर वाद-विवाद कर रहे थे तो उसमें भाग लेने के लिए नरेन्द्र को भी बुला लिया गया। बस, अब क्या था, नरेन्द्र ने थोड़े ही समय में यह सिद्व कर दिखाया कि उसने अधिकांश लेखकों की पुस्तकें न सिर्फ पढ़ ली हैं,


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