मुख्य वस्तु पर राष्ट्र का ध्यान केन्द्रित किया। देश का दुर्भाग्य यह है कि उनके बाद हमने मुख्य वस्तु से ध्यान हटाकर छिलके पर केन्द्रित किया। धर्म को राष्ट्र का मेरूदंड बताने में उनका जो आशय था राष्ट्र विरोधी तत्वों ने उसे भ्रष्ट करने, धूमिल बनाने और हमारी दृष्टि से ओझल रखने का षड्यंत्र रचा और हम मंज़िल से भटक गए।
लेकिन कहावत है कि सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो वह भूला नहीं कहलाता। पौन सदी, हमारे इस महान राष्ट्र के जीवन में क्षण के बराबर हैं। आइए,
मुख्य वस्तु पर राष्ट्र का ध्यान केन्द्रित किया। देश का दुर्भाग्य यह है कि उनके बाद हमने मुख्य वस्तु से ध्यान हटाकर छिलके पर केन्द्रित किया। धर्म को राष्ट्र का मेरूदंड बताने में उनका जो आशय था राष्ट्र विरोधी तत्वों ने उसे भ्रष्ट करने, धूमिल बनाने और हमारी दृष्टि से ओझल रखने का षड्यंत्र रचा और हम मंज़िल से भटक गए।
लेकिन कहावत है कि सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो वह भूला नहीं कहलाता। पौन सदी, हमारे इस महान राष्ट्र के जीवन में क्षण के बराबर हैं। आइए,