योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उन्होंने पिछले जन्म में जो पुण्य कर्म किए थे उनके फलस्वरूप वे उच्च वर्ण या श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुए हैं और इसी से उन्हें दूसरों के श्रम पर जीने का अधिकार प्राप्त है। शोषितों अर्थात् शूद्रों को यह आश्वासन दिया गया कि ये सारे दुःख और कष्ट तुम्हारे पिछले जन्म के बुरे कर्मों का फल है। अगर तुम इस जन्म में अपने वर्ण धर्म का पालन करते हुए हमारी निष्काम भाव से सेवा करोगे तो तुम भी अगले जन्म में उच्च वर्ण अथवा श्रेष्ठकुल में उत्पन्न होंगे और कठोर श्रम से छूट जाओगे।


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उन्होंने पिछले जन्म में जो पुण्य कर्म किए थे उनके फलस्वरूप वे उच्च वर्ण या श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुए हैं और इसी से उन्हें दूसरों के श्रम पर जीने का अधिकार प्राप्त है। शोषितों अर्थात् शूद्रों को यह आश्वासन दिया गया कि ये सारे दुःख और कष्ट तुम्हारे पिछले जन्म के बुरे कर्मों का फल है। अगर तुम इस जन्म में अपने वर्ण धर्म का पालन करते हुए हमारी निष्काम भाव से सेवा करोगे तो तुम भी अगले जन्म में उच्च वर्ण अथवा श्रेष्ठकुल में उत्पन्न होंगे और कठोर श्रम से छूट जाओगे।


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