योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

समग्र विश्व को अपने वर्तमान अनुभव से सीमित कर देना चाहते हैं। बच्चे सोचते हैं कि सारा विश्व बच्चों ही से भरा है। पागल समझते हैं कि सारा विश्व एक पागलखाना है, इसी तरह अन्य लोग। इसी प्रकार जिनके लिए यह जगत् इंद्रिय संबंधी भोग मात्र है, खाना और मौज उड़ाना ही जिनका समग्र जीवन है, उनमें तथा नृशंस पशुओं में बहुुत कम अंतर है, ऐसे लोगों के लिए किसी ऐसे स्थान की कल्पना करना स्वाभाविक है, जहां उन्हें और अधिक भोग प्राप्त होंगे, क्योंकि


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समग्र विश्व को अपने वर्तमान अनुभव से सीमित कर देना चाहते हैं। बच्चे सोचते हैं कि सारा विश्व बच्चों ही से भरा है। पागल समझते हैं कि सारा विश्व एक पागलखाना है, इसी तरह अन्य लोग। इसी प्रकार जिनके लिए यह जगत् इंद्रिय संबंधी भोग मात्र है, खाना और मौज उड़ाना ही जिनका समग्र जीवन है, उनमें तथा नृशंस पशुओं में बहुुत कम अंतर है, ऐसे लोगों के लिए किसी ऐसे स्थान की कल्पना करना स्वाभाविक है, जहां उन्हें और अधिक भोग प्राप्त होंगे, क्योंकि


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