योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

यह जीवन छोटा है। भोग के लिए उनकी इच्छा असीम है। अतएव वे ऐसे स्ािानों की कल्पना करने के लिए विवश हैं, जहां उन्हें इंद्रियों का अबाध भोग प्राप्त हो सकेगा। फिर जैसे हम और आगे बढ़ते हैं, हम देखते हैं कि जो ऐसे स्ािानों को जाना चाहते हैं, वे उसका स्वप्न देखेंगे और जब इस स्वप्न का अन्त होगा तो वे एक दूसरे स्थान का स्वप्न देखेंगे, जिसमें भोग प्रचुर मात्रा में होगा, और जब वह सपना टूटेगा तो उन्हें किसी अन्य वस्तु की बात सोचनी पडे़गी।


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यह जीवन छोटा है। भोग के लिए उनकी इच्छा असीम है। अतएव वे ऐसे स्ािानों की कल्पना करने के लिए विवश हैं, जहां उन्हें इंद्रियों का अबाध भोग प्राप्त हो सकेगा। फिर जैसे हम और आगे बढ़ते हैं, हम देखते हैं कि जो ऐसे स्ािानों को जाना चाहते हैं, वे उसका स्वप्न देखेंगे और जब इस स्वप्न का अन्त होगा तो वे एक दूसरे स्थान का स्वप्न देखेंगे, जिसमें भोग प्रचुर मात्रा में होगा, और जब वह सपना टूटेगा तो उन्हें किसी अन्य वस्तु की बात सोचनी पडे़गी।


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