बल्कि उनके बहुत-से अंश उसे कंठस्थ हैं और वह उनकी तर्कसंगत आलोचना भी कर सकता है। उन लेखक महोदय ने विस्मय और आनन्द में भरकर कहा, ‘‘बेटा! आशा है, एक दिन बंग भाषा तुम्हारे द्वारा गौरवान्वित होगी।’’
और अब यह कहने की कोई आवश्यकता नहीं कि उन लेखक महोदय की भविष्यवाणी सही सिद्व हुई।
नरेन्द्र रायपुर में दो बरस तक रहा। इस बीच में उसने पुस्तकों और वाद-विवाद द्वारा जो कुछ सीखा वह तो सीखा ही, पर इस संबंध में विशेष रूप से उल्लेखनीय
बल्कि उनके बहुत-से अंश उसे कंठस्थ हैं और वह उनकी तर्कसंगत आलोचना भी कर सकता है। उन लेखक महोदय ने विस्मय और आनन्द में भरकर कहा, ‘‘बेटा! आशा है, एक दिन बंग भाषा तुम्हारे द्वारा गौरवान्वित होगी।’’
और अब यह कहने की कोई आवश्यकता नहीं कि उन लेखक महोदय की भविष्यवाणी सही सिद्व हुई।
नरेन्द्र रायपुर में दो बरस तक रहा। इस बीच में उसने पुस्तकों और वाद-विवाद द्वारा जो कुछ सीखा वह तो सीखा ही, पर इस संबंध में विशेष रूप से उल्लेखनीय