योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

दूसरी का विचार है कि वे शरीर मात्र हैं। प्राचीन भारतीय तत्वचिंतकों ने ज़ोर देकर कहा है कि शरीर नश्वर है। जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर अन्य नवीन वस्त्रों को ग्रहण करता है वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर को छोड़कर अन्यान्य नवीन शरीरों को प्राप्त करती है।

‘‘जहां तक मेरा सवाल है, वातावरण एवं शिक्षा-दीक्षा के परिणाम से, मैं कुछ विपरीत ही सोचने को विवश हुआ था। मेरा अधिक सम्पर्क ईसाई एवं मुसलमानों से रहा, जो विशेषकर शरीर-सेवी होते हैं’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 106)


784 of 1197

दूसरी का विचार है कि वे शरीर मात्र हैं। प्राचीन भारतीय तत्वचिंतकों ने ज़ोर देकर कहा है कि शरीर नश्वर है। जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर अन्य नवीन वस्त्रों को ग्रहण करता है वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर को छोड़कर अन्यान्य नवीन शरीरों को प्राप्त करती है।

‘‘जहां तक मेरा सवाल है, वातावरण एवं शिक्षा-दीक्षा के परिणाम से, मैं कुछ विपरीत ही सोचने को विवश हुआ था। मेरा अधिक सम्पर्क ईसाई एवं मुसलमानों से रहा, जो विशेषकर शरीर-सेवी होते हैं’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 106)


784 of 1197