योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

हिन्दू शास्त्र यही कहते हैं। हिन्दू शास्त्र कहते हैं कि धर्म की अपेक्षा मोक्ष अवश्य ही बहुत बड़ा है, किन्तु पहले धर्म करना होगा। बौद्वों ने इसी स्थान पर भ्रम में पड़कर अनेक उत्पात खड़े कर दिए। अहिंसा ठीक है, निश्चय ही बड़ी बात है, कहने में बात तो अच्छी है, पर शास्त्र कहते हैं, तुम गृहस्थ हो, तुम्हारे गाल पर यदि कोई एक थप्पड़ मारे, और यदि तुम उसका जवाब दस थप्पड़ों से न दो, तो तुम पाप करते हो।’’ (दशम खंड, पृष्ठ 51)

विस्तार में जाने की गुंजाइश नहीं,


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हिन्दू शास्त्र यही कहते हैं। हिन्दू शास्त्र कहते हैं कि धर्म की अपेक्षा मोक्ष अवश्य ही बहुत बड़ा है, किन्तु पहले धर्म करना होगा। बौद्वों ने इसी स्थान पर भ्रम में पड़कर अनेक उत्पात खड़े कर दिए। अहिंसा ठीक है, निश्चय ही बड़ी बात है, कहने में बात तो अच्छी है, पर शास्त्र कहते हैं, तुम गृहस्थ हो, तुम्हारे गाल पर यदि कोई एक थप्पड़ मारे, और यदि तुम उसका जवाब दस थप्पड़ों से न दो, तो तुम पाप करते हो।’’ (दशम खंड, पृष्ठ 51)

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