इतना ही कह देना काफी है कि बुद्व क्रान्ति से भयभीत पुनरूत्थानवादी था। उसकी ऐतिहासिक भूमिका प्रगतिशील नहीं
159 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
प्रतिक्रियावादी है।
जैनमत का सृष्किर्ता ईश्वर में विश्वास नहीं। लेकिन उनका विश्वास है कि शुभ कार्य प्रत्येक आत्मा ईश्वरत्व को प्राप्त कर सकती है। महावीर स्वामी सिंह योनि से सीधे मनुष्य योनि में आए थे। जैनी हिंसा और संग्रह के बजाय अपरिग्रह पर सबसे अधिक ज़ोर देते हैं। लेकिन व्यवहार
इतना ही कह देना काफी है कि बुद्व क्रान्ति से भयभीत पुनरूत्थानवादी था। उसकी ऐतिहासिक भूमिका प्रगतिशील नहीं
159 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
प्रतिक्रियावादी है।
जैनमत का सृष्किर्ता ईश्वर में विश्वास नहीं। लेकिन उनका विश्वास है कि शुभ कार्य प्रत्येक आत्मा ईश्वरत्व को प्राप्त कर सकती है। महावीर स्वामी सिंह योनि से सीधे मनुष्य योनि में आए थे। जैनी हिंसा और संग्रह के बजाय अपरिग्रह पर सबसे अधिक ज़ोर देते हैं। लेकिन व्यवहार