योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



‘भाइयों! मैं तुम लोगों को दो-चार कठोर सत्यों से अवगत कराना चाहता हूं। समाचार पत्रों में पढ़ने में आया कि हमारे यहां एक व्यक्ति को किसी अंगे्रज़ ने मार डाला है अथवा उसके साथ बुरा बर्ताव किया है। बस, यह सब पढ़ते ही सारे देश में हो-हल्ला मच गया, इस समाचार को पढ़कर मैंने भी आंसु बहाए, पर थोड़ी देर बाद मेरे मन में यह सवाल पैदा हुआ कि इस प्रकार की घटना के लिए उत्तरदायी कौन है? चूंकि मैं वेदान्तवादी हूं, मैं स्वयं अपने से यह प्रश्न


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‘भाइयों! मैं तुम लोगों को दो-चार कठोर सत्यों से अवगत कराना चाहता हूं। समाचार पत्रों में पढ़ने में आया कि हमारे यहां एक व्यक्ति को किसी अंगे्रज़ ने मार डाला है अथवा उसके साथ बुरा बर्ताव किया है। बस, यह सब पढ़ते ही सारे देश में हो-हल्ला मच गया, इस समाचार को पढ़कर मैंने भी आंसु बहाए, पर थोड़ी देर बाद मेरे मन में यह सवाल पैदा हुआ कि इस प्रकार की घटना के लिए उत्तरदायी कौन है? चूंकि मैं वेदान्तवादी हूं, मैं स्वयं अपने से यह प्रश्न


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