किए बिना नहीं रह सका। हिन्दू सदा से अंतदृष्टि परायण रहा है। वह अपने अन्दर ही उसी के द्वारा सब विषयों का कारण ढूंढ़ा करता है। जब कभी मैं अपने मन से यह प्रश्न करता हूं कि उसके लिए कौन उत्तरदायी है, तभी मेरा मन बार-बार यह जवाब देता है कि इसके लिए अंग्रेज़ उत्तरदायी नही; बल्कि अपनी दुर-व्यवस्था के लिए, अपनी इस अवनति और इन सारे दुख-कष्टों के लिए एकमात्र हमीं उत्तरदायी हैं-हमारे सिवा इन बातों के लिए और कोई जिम्मेवार नहीं हो सकता।
किए बिना नहीं रह सका। हिन्दू सदा से अंतदृष्टि परायण रहा है। वह अपने अन्दर ही उसी के द्वारा सब विषयों का कारण ढूंढ़ा करता है। जब कभी मैं अपने मन से यह प्रश्न करता हूं कि उसके लिए कौन उत्तरदायी है, तभी मेरा मन बार-बार यह जवाब देता है कि इसके लिए अंग्रेज़ उत्तरदायी नही; बल्कि अपनी दुर-व्यवस्था के लिए, अपनी इस अवनति और इन सारे दुख-कष्टों के लिए एकमात्र हमीं उत्तरदायी हैं-हमारे सिवा इन बातों के लिए और कोई जिम्मेवार नहीं हो सकता।