पृष्ठ 87-88)
गीता में कहा गया है:
‘‘विषयासक्त अज्ञानी मनुष्यों को ज्ञान की शिक्षा देकर उनमें भ्रम न उत्पन्न करना चाहिए, बुद्विमान मनुष्य को स्वयं कर्म में लगे रहकर अज्ञानी लोगों को सभी कार्यो में लगाए रखना चाहिए।’’
विवेकानन्द अपने ‘अधिकारवाद के दोष’ भाषण में गीता के इसी श्लोक का हवाला देते हुए कहते हैं: ‘‘पुरातनकाल के ऋषियों के प्रति मेरी असीम श्रद्वा होते हुए भी मैं उनकी लोक शिक्षा पद्वति की आलोचना किए बिना नहीं
पृष्ठ 87-88)
गीता में कहा गया है:
‘‘विषयासक्त अज्ञानी मनुष्यों को ज्ञान की शिक्षा देकर उनमें भ्रम न उत्पन्न करना चाहिए, बुद्विमान मनुष्य को स्वयं कर्म में लगे रहकर अज्ञानी लोगों को सभी कार्यो में लगाए रखना चाहिए।’’
विवेकानन्द अपने ‘अधिकारवाद के दोष’ भाषण में गीता के इसी श्लोक का हवाला देते हुए कहते हैं: ‘‘पुरातनकाल के ऋषियों के प्रति मेरी असीम श्रद्वा होते हुए भी मैं उनकी लोक शिक्षा पद्वति की आलोचना किए बिना नहीं