शिकागो धर्म-महासभा में भाषण देते हुए विवेकानन्द ने अपने इस क्रमविकास के सिद्वांत की व्याख्या यों की थी: ‘‘विज्ञान एकत्व की खोज के सिवा और कुछ नहीं है। ज्यों ही कोई विज्ञान पूर्ण एकता तक पहुंच जाएगा, त्योंही उसकी प्रगति रूक जाएगी, क्योंकि तब वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। उदाहरणार्थ, रसायन शास्त्र यदि एक बार उस मूल तत्व का पता लगा ले, जिससे और सब द्रव्य बन सकते हैं, तो वह फिर और आगे नहीं बढ़ सकेगा। भौतिकी जब उस एक मूल शक्ति का पता लगा लेगी,
शिकागो धर्म-महासभा में भाषण देते हुए विवेकानन्द ने अपने इस क्रमविकास के सिद्वांत की व्याख्या यों की थी: ‘‘विज्ञान एकत्व की खोज के सिवा और कुछ नहीं है। ज्यों ही कोई विज्ञान पूर्ण एकता तक पहुंच जाएगा, त्योंही उसकी प्रगति रूक जाएगी, क्योंकि तब वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। उदाहरणार्थ, रसायन शास्त्र यदि एक बार उस मूल तत्व का पता लगा ले, जिससे और सब द्रव्य बन सकते हैं, तो वह फिर और आगे नहीं बढ़ सकेगा। भौतिकी जब उस एक मूल शक्ति का पता लगा लेगी,