योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

क्योंकि उच्चतर ज्ञान तुम लोगों के लिए नहीं हैं। निर्भयातापूर्ण सत्य की घोषणा करो, यह न कहो कि इससे कमज़ोर बुद्वि वाले भ्रम में पड़ जाएंगे...’’ (प्रथम खंड, पृष्ठ 326)

सवर्ण चाहते ही नहीं थे कि शुद्र-वर्ण-व्यवस्था में भंगी, चमार ही नहीं-नाई, धोबी, लोहार, तरखान-सभी मेहनतकश अछूत थे, आज भी हैं-शास्त्र की विद्या प्राप्त करें, एकलव्य ने अपने ही प्रयास से धनुष-विद्या सीख ली थी तो द्रोणाचार्य ने गुरू-दक्षिणा के नाम पर उसके दांह


801 of 1197

क्योंकि उच्चतर ज्ञान तुम लोगों के लिए नहीं हैं। निर्भयातापूर्ण सत्य की घोषणा करो, यह न कहो कि इससे कमज़ोर बुद्वि वाले भ्रम में पड़ जाएंगे...’’ (प्रथम खंड, पृष्ठ 326)

सवर्ण चाहते ही नहीं थे कि शुद्र-वर्ण-व्यवस्था में भंगी, चमार ही नहीं-नाई, धोबी, लोहार, तरखान-सभी मेहनतकश अछूत थे, आज भी हैं-शास्त्र की विद्या प्राप्त करें, एकलव्य ने अपने ही प्रयास से धनुष-विद्या सीख ली थी तो द्रोणाचार्य ने गुरू-दक्षिणा के नाम पर उसके दांह


801 of 1197