‘उठो और युद्व करो’ कहने के साथ ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन के दोनों हाथों में लड्डू थमा दिए थे-जीते जी राज और मरने पर स्वर्ग। लेकिन शूद्रों के लिए निष्काम कर्म, सिर्फ निष्काम कर्म।
‘‘जो कर्त्तव्य के निमित्त कर्त्तव्य के रूप में किया जाता है, वहीं कर्म के बन्धनों का नाश कर सकता है।’’ शूद्रों से कहा जाता है, ‘‘कर्म करने ही का अधिकार तुम्हें है, उसके फल का नहीं।’’ दरअसल कर्म का फल उनके लिए था ही नहीं। वे तो संसार के दुःख-सुख
‘उठो और युद्व करो’ कहने के साथ ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन के दोनों हाथों में लड्डू थमा दिए थे-जीते जी राज और मरने पर स्वर्ग। लेकिन शूद्रों के लिए निष्काम कर्म, सिर्फ निष्काम कर्म।
‘‘जो कर्त्तव्य के निमित्त कर्त्तव्य के रूप में किया जाता है, वहीं कर्म के बन्धनों का नाश कर सकता है।’’ शूद्रों से कहा जाता है, ‘‘कर्म करने ही का अधिकार तुम्हें है, उसके फल का नहीं।’’ दरअसल कर्म का फल उनके लिए था ही नहीं। वे तो संसार के दुःख-सुख