योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

नीच जाति वालों का गला ऐसी क्रूरता से घोंटता हो। प्रभु ने मुझे दिखा दिया है कि इसमें धर्म का कोई दोष नहीं, वरन् दोष उनका है, जो ढोंगी और दम्भी है, जो ‘पारमार्थिक’ और व्यावहारिक सिद्वान्तों के रूप में अनेक प्रकार से अत्याचार के अस्त्रों का निर्माण करते हैं।’’

ये अत्याचार के अस्त्रों का निर्माण करने वाले विदेशी शासकों से मिलकर भारत की उस श्रमजीवी जनता को चूस रहे थे, जिसे विवेकानन्द ने अपने देश-भ्रमण के दौरान ज़िन्दगी का


806 of 1197

नीच जाति वालों का गला ऐसी क्रूरता से घोंटता हो। प्रभु ने मुझे दिखा दिया है कि इसमें धर्म का कोई दोष नहीं, वरन् दोष उनका है, जो ढोंगी और दम्भी है, जो ‘पारमार्थिक’ और व्यावहारिक सिद्वान्तों के रूप में अनेक प्रकार से अत्याचार के अस्त्रों का निर्माण करते हैं।’’

ये अत्याचार के अस्त्रों का निर्माण करने वाले विदेशी शासकों से मिलकर भारत की उस श्रमजीवी जनता को चूस रहे थे, जिसे विवेकानन्द ने अपने देश-भ्रमण के दौरान ज़िन्दगी का


806 of 1197