योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

भगवती की प्रतिमारूपिणी रमणी को सन्तान पैदा करने वाली दासी और जीवन को अभिशाप बना दिया है, उसकी वे कल्पना भी नहीं कर पाते।’’ (प्रथम खंड, पृष्ठ 403-404)

आम लोगों में वेदान्त दर्शन को उपनिषद्, महाभारत तथा पुराणों की कथाओं द्वारा प्रचारित-प्रसारित किया गया। नमूने की एक कथा देखिए, जिसका विवेकानन्द ने ‘ज्ञान योग पर प्रवचन’ में प्रयोग किया है:

‘‘एक समय एक संन्यासी किसी पेड़ के नीचे बैठता था और लोगों को पढ़ाया करता था। वह केवल


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भगवती की प्रतिमारूपिणी रमणी को सन्तान पैदा करने वाली दासी और जीवन को अभिशाप बना दिया है, उसकी वे कल्पना भी नहीं कर पाते।’’ (प्रथम खंड, पृष्ठ 403-404)

आम लोगों में वेदान्त दर्शन को उपनिषद्, महाभारत तथा पुराणों की कथाओं द्वारा प्रचारित-प्रसारित किया गया। नमूने की एक कथा देखिए, जिसका विवेकानन्द ने ‘ज्ञान योग पर प्रवचन’ में प्रयोग किया है:

‘‘एक समय एक संन्यासी किसी पेड़ के नीचे बैठता था और लोगों को पढ़ाया करता था। वह केवल


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