योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उनका अपना ही ढंग था। अपने उद्दंड स्वभाव के कारण नरेन्द्र ने एक दिन मां को कुछ कटु शब्द कह दिए। विश्वनाथ ने इसके लिए बेटे को कुछ नहीं कहा, पर जब नरेन्द्र अपने सहपाठियों के साथ अपने पढ़ने के कमरे में गया तो कोयले से दीवार कर यह लिखा मिलाः ‘‘नरेन्द्र बाबू ने अपनी माता के प्रति आज इन दुर्वचनों का प्रयोग किया है।’’ नरेन्द्र की गर्दन लज्जा से झुक गई और वह इस शिक्षा को उम्र भर नहीं भूल पाया।

अगर कोई व्यक्ति नरेन्द्र की युक्तिपूर्ण


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उनका अपना ही ढंग था। अपने उद्दंड स्वभाव के कारण नरेन्द्र ने एक दिन मां को कुछ कटु शब्द कह दिए। विश्वनाथ ने इसके लिए बेटे को कुछ नहीं कहा, पर जब नरेन्द्र अपने सहपाठियों के साथ अपने पढ़ने के कमरे में गया तो कोयले से दीवार कर यह लिखा मिलाः ‘‘नरेन्द्र बाबू ने अपनी माता के प्रति आज इन दुर्वचनों का प्रयोग किया है।’’ नरेन्द्र की गर्दन लज्जा से झुक गई और वह इस शिक्षा को उम्र भर नहीं भूल पाया।

अगर कोई व्यक्ति नरेन्द्र की युक्तिपूर्ण


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