योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

बातों को बच्चे की धृष्टता समझकर उपेक्षा करता तो वह क्रोध के मारे आपे से बाहर हो जाता। उस समय उसे छोटे-बड़े का भी ध्यान न रहता। कई बार वह अपने पिता के मित्रों तक को खरी-खरी सुना देता। विश्वनाथ इस उद्दंडता के लिए बेटे को क्षमा नहीं करते थे। वे नरेन्द्र को दंड देकर आगे के लिए सावधान कर देते थे। पर बेटे की आत्मनिष्ठा को देखते हुए मन ही मन में वे प्रसन्न भी होते थे।

24 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

विश्वनाथ पाकविद्या में


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बातों को बच्चे की धृष्टता समझकर उपेक्षा करता तो वह क्रोध के मारे आपे से बाहर हो जाता। उस समय उसे छोटे-बड़े का भी ध्यान न रहता। कई बार वह अपने पिता के मित्रों तक को खरी-खरी सुना देता। विश्वनाथ इस उद्दंडता के लिए बेटे को क्षमा नहीं करते थे। वे नरेन्द्र को दंड देकर आगे के लिए सावधान कर देते थे। पर बेटे की आत्मनिष्ठा को देखते हुए मन ही मन में वे प्रसन्न भी होते थे।

24 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

विश्वनाथ पाकविद्या में


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