अभिन्न अंग है। इसलिए उसे हटाने का प्रयास करने के बजाए शरीर बेचने वाली विवश कुलटा स्त्री को, उसे ही क्या सभी उत्पीड़ित तथा शोषित श्रमजीवियों को सांत्वना दी गई कि तुम्हारा कार्य कितना ही घृणित और कष्टदायक हो, तुम उसे निष्काम भाव से करते रहो और प्रभु में मन लगाए रहो तो तुम स्वर्ग में जाओगे।
तीसरे, न अशुभ देखो, न अशुभ सुनो, न अशुभ बोलो। अर्थात् बड़े आदमियों की धृष्टता पर ध्यान मत दो। वरना तुम दूध पीने और फल खाने और पत्रित कहलाने
अभिन्न अंग है। इसलिए उसे हटाने का प्रयास करने के बजाए शरीर बेचने वाली विवश कुलटा स्त्री को, उसे ही क्या सभी उत्पीड़ित तथा शोषित श्रमजीवियों को सांत्वना दी गई कि तुम्हारा कार्य कितना ही घृणित और कष्टदायक हो, तुम उसे निष्काम भाव से करते रहो और प्रभु में मन लगाए रहो तो तुम स्वर्ग में जाओगे।
तीसरे, न अशुभ देखो, न अशुभ सुनो, न अशुभ बोलो। अर्थात् बड़े आदमियों की धृष्टता पर ध्यान मत दो। वरना तुम दूध पीने और फल खाने और पत्रित कहलाने