रूखी सूखी खाए के ठंडा पानी पीव।
अपने लिए और निम्न वर्ग के लिए नैतिकता के मापदंड अलग-अलग थे। महाभारत और रामायण की बड़ी महिमा है। निश्चित रूप से न सिर्फ भाषा और साहित्य के विकास में बल्कि समाज-गठन में उनका बहुत बड़ा योगदान है और ये दोनों महाकाव्य हमारी अमूल्य संस्कृति हैं। लेकिन इनका आधार वेदान्त दर्शन है और इनके द्वारा वही दोहरी नैतिकता प्रचारित-प्रसारित हुई है।
विश्लेषण के लिए महाभारत के मुख्य पात्र धर्मपुत्र युधिष्ठिर
रूखी सूखी खाए के ठंडा पानी पीव।
अपने लिए और निम्न वर्ग के लिए नैतिकता के मापदंड अलग-अलग थे। महाभारत और रामायण की बड़ी महिमा है। निश्चित रूप से न सिर्फ भाषा और साहित्य के विकास में बल्कि समाज-गठन में उनका बहुत बड़ा योगदान है और ये दोनों महाकाव्य हमारी अमूल्य संस्कृति हैं। लेकिन इनका आधार वेदान्त दर्शन है और इनके द्वारा वही दोहरी नैतिकता प्रचारित-प्रसारित हुई है।
विश्लेषण के लिए महाभारत के मुख्य पात्र धर्मपुत्र युधिष्ठिर