नहीं जानता कि वह नर था या पशु’’ शंख और घड़ियाल बजाकर कोलाहल में डुबा दिया गया।
जब युधिष्ठिर को मालूम था कि अश्वत्थामा नाम के हाथी की हत्या षड्यंत्र को सफल बनाने की नियति ही से की गई तो क्या धर्मपुत्र इसमें सहयोगी नहीं बना? श्रीकृष्ण द्वारा इस्तेमाल नहीं हुआ? फिर यह कौन-सी नैतिकता है? कौन-सा सत्याचरण है? वही इनके महाकवि तुलसी की बात:
समरथ को नहीं दोष गुसाईं।
अब लीजिए रामायण की बात। कहते हैं कि दशरथ ने राम का राज्याभिषेक
नहीं जानता कि वह नर था या पशु’’ शंख और घड़ियाल बजाकर कोलाहल में डुबा दिया गया।
जब युधिष्ठिर को मालूम था कि अश्वत्थामा नाम के हाथी की हत्या षड्यंत्र को सफल बनाने की नियति ही से की गई तो क्या धर्मपुत्र इसमें सहयोगी नहीं बना? श्रीकृष्ण द्वारा इस्तेमाल नहीं हुआ? फिर यह कौन-सी नैतिकता है? कौन-सा सत्याचरण है? वही इनके महाकवि तुलसी की बात:
समरथ को नहीं दोष गुसाईं।
अब लीजिए रामायण की बात। कहते हैं कि दशरथ ने राम का राज्याभिषेक