करने के लिए प्रजा से अनुमति प्राप्त की थी। अगर प्रजा की बात का इतना ही सम्मान था तो उसे एक कैकेयी के विरोध पर रद्द क्यों कर दिया गया?
दूसरे, आदर्श चरित्र राम ने बड़ा त्याग किया। पिता की बात रखने के लिए
164 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
गद्दी ठुकरा दी। भरत ने भी बड़ा त्याग किया कि उस पर खुद बैठने के बजाय बड़े भाई के खड़ावें रख दी। सवाल यह है: त्याग किसने किसके लिए किया? गद्दी किसी धोबी या तरखान के पास तो चली नहीं गई, दशरथ
करने के लिए प्रजा से अनुमति प्राप्त की थी। अगर प्रजा की बात का इतना ही सम्मान था तो उसे एक कैकेयी के विरोध पर रद्द क्यों कर दिया गया?
दूसरे, आदर्श चरित्र राम ने बड़ा त्याग किया। पिता की बात रखने के लिए
164 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
गद्दी ठुकरा दी। भरत ने भी बड़ा त्याग किया कि उस पर खुद बैठने के बजाय बड़े भाई के खड़ावें रख दी। सवाल यह है: त्याग किसने किसके लिए किया? गद्दी किसी धोबी या तरखान के पास तो चली नहीं गई, दशरथ