और लिखा है: ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं कि ग्राम पंचायतों में गणतांत्रिक शासन पद्वति का बीज अवश्य था और अब भी अनेक स्ािानों में हैं, पर वह बीज जहां बोया गया, वहां अंकुरित नहीं हुुआ। यह भाव गांव की पंचायत को छोड़कर समाज तक बढ़ ही नहीं सका’’ (पृष्ठ 204)
‘वर्तमान भारत’ नाम के जिस लेख से ये उद्वरण लिए गए हैं, वह विवेकानन्द ने 1899 में लिखा था और उत्कृत्ट बंगला साहित्य में इसका प्रमुख स्थान है। पहले वे आदर्शवादी दृष्टि से बुद्व
और लिखा है: ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं कि ग्राम पंचायतों में गणतांत्रिक शासन पद्वति का बीज अवश्य था और अब भी अनेक स्ािानों में हैं, पर वह बीज जहां बोया गया, वहां अंकुरित नहीं हुुआ। यह भाव गांव की पंचायत को छोड़कर समाज तक बढ़ ही नहीं सका’’ (पृष्ठ 204)
‘वर्तमान भारत’ नाम के जिस लेख से ये उद्वरण लिए गए हैं, वह विवेकानन्द ने 1899 में लिखा था और उत्कृत्ट बंगला साहित्य में इसका प्रमुख स्थान है। पहले वे आदर्शवादी दृष्टि से बुद्व