और ईसा सरीखे व्यक्तियों को इतिहास बनाने वाले मानते थे, पर इस लेख में वे कितना बदल गए थे, उसका प्रमाण लीजिए। लिखा है:
‘‘समाज का नेतृत्व चाहे विद्या-बल से प्राप्त हुआ हो, चाहे बाहुबल से अथवा धन-बल से, पर उस शक्ति का आधार प्रजा ही है। शासक समाज जितना ही इस शक्ति के आधार से अलग रहेगा, उतना ही वह दुर्बल होगा। परन्तु माया की ऐसी विचित्र लीला है जिनसे परोक्ष रीति से, छल-बल-कौशल के प्रयोग से अथवा प्रतिग्रह द्वारा शक्ति प्राप्त की जाती है,
और ईसा सरीखे व्यक्तियों को इतिहास बनाने वाले मानते थे, पर इस लेख में वे कितना बदल गए थे, उसका प्रमाण लीजिए। लिखा है:
‘‘समाज का नेतृत्व चाहे विद्या-बल से प्राप्त हुआ हो, चाहे बाहुबल से अथवा धन-बल से, पर उस शक्ति का आधार प्रजा ही है। शासक समाज जितना ही इस शक्ति के आधार से अलग रहेगा, उतना ही वह दुर्बल होगा। परन्तु माया की ऐसी विचित्र लीला है जिनसे परोक्ष रीति से, छल-बल-कौशल के प्रयोग से अथवा प्रतिग्रह द्वारा शक्ति प्राप्त की जाती है,