उन्हीं की गणना शासकों के निकट शीघ्र समाप्त हो जाती है, जब पुरोहित शक्ति ने अपनी शक्ति के आधार प्रजा वर्ग से अपने को सम्पूर्ण अलग किया, तब प्रजा की सहायता पाने वाली उस समय की राज-शक्ति ने उसे पराजित किया। फिर जब राज-शक्ति ने अपने को सम्पूर्ण स्वीधीन
165 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
समझकर अपने और अपनी प्रजा के बीच में एक गहरी खाई खोद डाली, तब साधारण प्रजा की कुछ अधिक सहायता पाने वाले वैश्य कुल ने राजाओं को या तो नष्ट
उन्हीं की गणना शासकों के निकट शीघ्र समाप्त हो जाती है, जब पुरोहित शक्ति ने अपनी शक्ति के आधार प्रजा वर्ग से अपने को सम्पूर्ण अलग किया, तब प्रजा की सहायता पाने वाली उस समय की राज-शक्ति ने उसे पराजित किया। फिर जब राज-शक्ति ने अपने को सम्पूर्ण स्वीधीन
165 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
समझकर अपने और अपनी प्रजा के बीच में एक गहरी खाई खोद डाली, तब साधारण प्रजा की कुछ अधिक सहायता पाने वाले वैश्य कुल ने राजाओं को या तो नष्ट