कर डाला या अपने हाथ की कठपुतलियां बनाया। इस समय वैश्य कुल अपनी स्वार्थ-सिद्वि कर चुका है, इसीलिए प्रजा की सहायता को अनावश्यक समझ वह अपने को प्रजा वर्ग से अलग करना चाहता है। यहां इस शक्ति की भी मृत्यु का बीज बोया जा चुका है।’’ (पृष्ठ 222)
ऐतिहासिक भौतिकवाद की दृष्टि से जनसाधारण ही इतिहास के निर्माता हैं। सभी क्रान्तियों के पीछे मूल शक्ति वही रही है, लेकिन क्रान्ति के फल को एक के बाद दूसरे शोषक वर्ग ने हथिया लिया। विवेकानन्द
कर डाला या अपने हाथ की कठपुतलियां बनाया। इस समय वैश्य कुल अपनी स्वार्थ-सिद्वि कर चुका है, इसीलिए प्रजा की सहायता को अनावश्यक समझ वह अपने को प्रजा वर्ग से अलग करना चाहता है। यहां इस शक्ति की भी मृत्यु का बीज बोया जा चुका है।’’ (पृष्ठ 222)
ऐतिहासिक भौतिकवाद की दृष्टि से जनसाधारण ही इतिहास के निर्माता हैं। सभी क्रान्तियों के पीछे मूल शक्ति वही रही है, लेकिन क्रान्ति के फल को एक के बाद दूसरे शोषक वर्ग ने हथिया लिया। विवेकानन्द