योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

कवियों तथा लेखकों द्वारा अंगे्रज़ जाति के इसी ‘गौरव’ को भारतवासियों के हृदय पर अंकित करने, उन्हें कालिदास और कबीर की परम्परा से तोड़कर मिल्टन और शेक्सपीयर की परम्परा से जोड़ने का और यह बताने का भरसक प्रयास किया गया कि गोरे प्रभु हम काले जंगलियों को सभ्य बनाने के पवित्र मिशन पर सात समुद्र पार से आए हैं। अंग्रेज़ अपने इस प्रयास में काफी हद तक सफल हुए और परिणाम यह कि हम उसका दंड उनके चले जाने के 30 बरस बाद भी भुगत रहे हैं और


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कवियों तथा लेखकों द्वारा अंगे्रज़ जाति के इसी ‘गौरव’ को भारतवासियों के हृदय पर अंकित करने, उन्हें कालिदास और कबीर की परम्परा से तोड़कर मिल्टन और शेक्सपीयर की परम्परा से जोड़ने का और यह बताने का भरसक प्रयास किया गया कि गोरे प्रभु हम काले जंगलियों को सभ्य बनाने के पवित्र मिशन पर सात समुद्र पार से आए हैं। अंग्रेज़ अपने इस प्रयास में काफी हद तक सफल हुए और परिणाम यह कि हम उसका दंड उनके चले जाने के 30 बरस बाद भी भुगत रहे हैं और


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