उनकी औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली द्वारा हमारा अब भी बराबर अभारतीयकरण हो रहा है।
विवेकानन्द उसी ‘वर्तमान भारत’ लेख में आगे लिखते हैं:
ऊपर कहा जा चुका है कि परदेशियों के सम्पर्क से भारत धीरे-धीरे जग रहा है। इस थोड़ी-सी जाग्रति के फलस्वरूप स्वतंत्र विचार का थोड़ा-बहुत उदय भी होने लगा है। एक ओर आधुनिक पाश्चात्य विज्ञान है, जिसका शक्ति-संग्रह सबकी आंखों के सामने उसे प्रमाणित कर रहा है और जिसकी चमक सैकड़ों सूर्यों की ज्योति
उनकी औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली द्वारा हमारा अब भी बराबर अभारतीयकरण हो रहा है।
विवेकानन्द उसी ‘वर्तमान भारत’ लेख में आगे लिखते हैं:
ऊपर कहा जा चुका है कि परदेशियों के सम्पर्क से भारत धीरे-धीरे जग रहा है। इस थोड़ी-सी जाग्रति के फलस्वरूप स्वतंत्र विचार का थोड़ा-बहुत उदय भी होने लगा है। एक ओर आधुनिक पाश्चात्य विज्ञान है, जिसका शक्ति-संग्रह सबकी आंखों के सामने उसे प्रमाणित कर रहा है और जिसकी चमक सैकड़ों सूर्यों की ज्योति