योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

जिन्होंने इस जाति को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। ये दोनों मिलकर मानो राष्ट्रीय चरित्र के मुख्य स्वर हो गए। इनका संयोग इस जाति को सदा इन्द्रियों से परे ले जाने के लिए प्रेरित करता रहा है-वह उनके उस गम्भीर चिन्तन का रहस्य है, जो उनके शिल्पियों द्वारा निर्मित इस्पात की उस छुरी की भांति है, जो लोहे का छड़ काट सकती थी, किन्तु यह इतनी लचीली थी कि उसे वृत्याकार मोड़ा जा सकता था।

‘‘सोने-चांदी में भी उन्होंने कविता ढाली। मणियों


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जिन्होंने इस जाति को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। ये दोनों मिलकर मानो राष्ट्रीय चरित्र के मुख्य स्वर हो गए। इनका संयोग इस जाति को सदा इन्द्रियों से परे ले जाने के लिए प्रेरित करता रहा है-वह उनके उस गम्भीर चिन्तन का रहस्य है, जो उनके शिल्पियों द्वारा निर्मित इस्पात की उस छुरी की भांति है, जो लोहे का छड़ काट सकती थी, किन्तु यह इतनी लचीली थी कि उसे वृत्याकार मोड़ा जा सकता था।

‘‘सोने-चांदी में भी उन्होंने कविता ढाली। मणियों


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