योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

का अद्भुुत संयोजन संगमरमर में चमत्कारपूर्ण कौशल, रंगों मंे रागिनी, महीन पट जो वास्तविक संसार की अपेक्षा स्वप्नलोक का अधिक प्रतीत हेता है-इन सबके पीछे इसी राष्ट्रीय चरित्र की अभिव्यक्ति के सहÛों वर्षों की साधना निहित है।’’

‘‘कला एवं विज्ञान, यहां तक कि पारिवारिक जीवन के तथ्य भी काव्यात्मक भावों से परिवेष्ठित हैं, जो इस सीमा तक आगे बढ़ जाते हैं कि ऐंद्रिए अतींद्रिय का स्पर्श कर ले, स्थूल यथार्थता भी अयथार्थता की गुलाबी आभा से अनुरंजित हो जाए?’’ (दशम खंड, पृष्ठ 117)


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का अद्भुुत संयोजन संगमरमर में चमत्कारपूर्ण कौशल, रंगों मंे रागिनी, महीन पट जो वास्तविक संसार की अपेक्षा स्वप्नलोक का अधिक प्रतीत हेता है-इन सबके पीछे इसी राष्ट्रीय चरित्र की अभिव्यक्ति के सहÛों वर्षों की साधना निहित है।’’

‘‘कला एवं विज्ञान, यहां तक कि पारिवारिक जीवन के तथ्य भी काव्यात्मक भावों से परिवेष्ठित हैं, जो इस सीमा तक आगे बढ़ जाते हैं कि ऐंद्रिए अतींद्रिय का स्पर्श कर ले, स्थूल यथार्थता भी अयथार्थता की गुलाबी आभा से अनुरंजित हो जाए?’’ (दशम खंड, पृष्ठ 117)


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