अंग्रेज़ शासकों द्वारा हमें अपनी इस महान सांस्कृतिक परम्परा से तोड़ने का,
168 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
हमारे अभारतीयकरण का, जो प्रयास किया गया, उस पर विवेकानन्द ने ‘भारत का भविष्य’ में यों प्रकाश डाला है:
‘‘यह शिक्षा केवल तथा सम्पूर्णतः निषेधात्मक है। निषेधात्मक शिक्षा या निषेध की बुनियाद पर आधारित शिक्षा मृत्यु से भी भयानक है। कोमल मति बालक पाठशाला में भरती होता है और सबसे पहली बात, जो उसे सिखाई जाती है, वह यह
अंग्रेज़ शासकों द्वारा हमें अपनी इस महान सांस्कृतिक परम्परा से तोड़ने का,
168 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
हमारे अभारतीयकरण का, जो प्रयास किया गया, उस पर विवेकानन्द ने ‘भारत का भविष्य’ में यों प्रकाश डाला है:
‘‘यह शिक्षा केवल तथा सम्पूर्णतः निषेधात्मक है। निषेधात्मक शिक्षा या निषेध की बुनियाद पर आधारित शिक्षा मृत्यु से भी भयानक है। कोमल मति बालक पाठशाला में भरती होता है और सबसे पहली बात, जो उसे सिखाई जाती है, वह यह