अच्छा है। मैं केवल चाहता हूं कि अब तक जो तुमने किया, सो अच्छा ही किया, अब इस समय और भी अच्छा करने का मौका आ गया है।’’
खत लम्बा है, इसमें अपने वेदान्त दर्शन द्वारा वर्ण-व्यवस्था की व्याख्या उन्होंने यों की है:
‘‘जात-पांत ही की बात लीजिए। संस्कृत में ‘जाति’ का अर्थ है वर्ग या श्रेणीविशेष। यह सृष्टि के मूल ही में विद्यमान है। विभिन्न वेदों में इस प्रकार की बात पाई जाती है। सृष्टि के पूर्व में एकत्व रहता है। अर्थात् जाति
अच्छा है। मैं केवल चाहता हूं कि अब तक जो तुमने किया, सो अच्छा ही किया, अब इस समय और भी अच्छा करने का मौका आ गया है।’’
खत लम्बा है, इसमें अपने वेदान्त दर्शन द्वारा वर्ण-व्यवस्था की व्याख्या उन्होंने यों की है:
‘‘जात-पांत ही की बात लीजिए। संस्कृत में ‘जाति’ का अर्थ है वर्ग या श्रेणीविशेष। यह सृष्टि के मूल ही में विद्यमान है। विभिन्न वेदों में इस प्रकार की बात पाई जाती है। सृष्टि के पूर्व में एकत्व रहता है। अर्थात् जाति