योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

का अर्थ है सृष्टि। सृष्टि हुई कि वैविध्य शुरू हुआ। यदि यह विविधता समाप्त हो जाए, तो सृष्टि ही का लोप हो जाएगा। जब तक कोई जाति शक्तिशाली और क्रियाशील रहेगी, तब तक वह विविधता अवश्य पैदा करेगी। ज्यांेही उसकी ऐसी विविधता का उत्पादन करना बंद कर दिया जाता है, त्यांेही वह जाति नष्ट हो जाती है। जाति का मूल अर्थ था प्रत्येक व्यक्ति की अपनी प्रकृति को, अपने विशेषत्व को प्रकाशित करने की स्वाधीनता और यही अर्थ हज़ारों वर्ष तक प्रचलित


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का अर्थ है सृष्टि। सृष्टि हुई कि वैविध्य शुरू हुआ। यदि यह विविधता समाप्त हो जाए, तो सृष्टि ही का लोप हो जाएगा। जब तक कोई जाति शक्तिशाली और क्रियाशील रहेगी, तब तक वह विविधता अवश्य पैदा करेगी। ज्यांेही उसकी ऐसी विविधता का उत्पादन करना बंद कर दिया जाता है, त्यांेही वह जाति नष्ट हो जाती है। जाति का मूल अर्थ था प्रत्येक व्यक्ति की अपनी प्रकृति को, अपने विशेषत्व को प्रकाशित करने की स्वाधीनता और यही अर्थ हज़ारों वर्ष तक प्रचलित


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