बल्कि जाति की प्रगति में वह एक रूकावट है। वास्तव में उसने सच्ची जाति अथवा विविधता की स्वच्छंता को रोक दिया है। मतलब यह कि जब तक हमारा राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर रहा, जाति गुणगत बनी रही और प्रत्येक व्यक्ति की अपनी प्रकृति के प्रकाशित होने की विकास-प्रक्रिया भी निरन्तर जारी रही, पर जब विदेशी आक्रमणकारियों के हस्तक्षेप से राष्ट्र की प्रगति अवरूद्व हुई तो जाति गुणगत न रहकर जन्मगत अथवा वंशगत बन गई, उसने रूढ़ वर्ण-व्यवस्था
बल्कि जाति की प्रगति में वह एक रूकावट है। वास्तव में उसने सच्ची जाति अथवा विविधता की स्वच्छंता को रोक दिया है। मतलब यह कि जब तक हमारा राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर रहा, जाति गुणगत बनी रही और प्रत्येक व्यक्ति की अपनी प्रकृति के प्रकाशित होने की विकास-प्रक्रिया भी निरन्तर जारी रही, पर जब विदेशी आक्रमणकारियों के हस्तक्षेप से राष्ट्र की प्रगति अवरूद्व हुई तो जाति गुणगत न रहकर जन्मगत अथवा वंशगत बन गई, उसने रूढ़ वर्ण-व्यवस्था