का रूप धारण किया और यही बात हमारे अधःपतन का कारण बनी।’’ अतएव आगे लिखा है, ‘‘हमारा जातीय प्रासाद अभी अधुरा ही है, इसलिए सब कुछ भद्दा दीख पड़ रहा है। सदियों के अत्याचार के कारण हमें प्रासाद-निर्माण का कार्य छोड़ देना पड़ा था। अब निर्माण-कार्य पूरा कर लीजिए, बस, सब कुछ अपनी-अपनी जगह पर सजा हुआ सुन्दर दिखाई देगा। यही मेरी समस्त कार्य-योजना है। मैं इसका पूरा कायल हूं।’’ (तृतीय खंड)
अब देखिए, 30 मई, 1897 को अर्थात् दो बरस बाद
का रूप धारण किया और यही बात हमारे अधःपतन का कारण बनी।’’ अतएव आगे लिखा है, ‘‘हमारा जातीय प्रासाद अभी अधुरा ही है, इसलिए सब कुछ भद्दा दीख पड़ रहा है। सदियों के अत्याचार के कारण हमें प्रासाद-निर्माण का कार्य छोड़ देना पड़ा था। अब निर्माण-कार्य पूरा कर लीजिए, बस, सब कुछ अपनी-अपनी जगह पर सजा हुआ सुन्दर दिखाई देगा। यही मेरी समस्त कार्य-योजना है। मैं इसका पूरा कायल हूं।’’ (तृतीय खंड)
अब देखिए, 30 मई, 1897 को अर्थात् दो बरस बाद