योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उन्होंने प्रमदादास मित्र के नाम अल्मोड़ा से लिखे पत्र में अपनी इस कार्य-योजना और वेदान्त दर्शन की व्याख्या इस प्रकार की है:

‘‘इसके अतिरिक्त मेरी विचारधारा में बहुुत विकृति आ गई-’’ विकृति में व्यंग्य-ध्वनि है, क्योंकि विकृति प्रमदादास मित्र के ख्याल से थी, वास्तव में यह विकास था, ‘‘मैं एक निर्गुण पूर्ण ब्रह्म को देखता हूं, यदि वे ही व्यक्ति ईश्वर के नाम से पुकारे जाएं तो मैं इस विचार को ग्रहण कर सकता हूं, परन्तु बौद्विक


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उन्होंने प्रमदादास मित्र के नाम अल्मोड़ा से लिखे पत्र में अपनी इस कार्य-योजना और वेदान्त दर्शन की व्याख्या इस प्रकार की है:

‘‘इसके अतिरिक्त मेरी विचारधारा में बहुुत विकृति आ गई-’’ विकृति में व्यंग्य-ध्वनि है, क्योंकि विकृति प्रमदादास मित्र के ख्याल से थी, वास्तव में यह विकास था, ‘‘मैं एक निर्गुण पूर्ण ब्रह्म को देखता हूं, यदि वे ही व्यक्ति ईश्वर के नाम से पुकारे जाएं तो मैं इस विचार को ग्रहण कर सकता हूं, परन्तु बौद्विक


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