नानक, कबीर आदि सच्चे अवतार हैं, क्योंकि उनके हृदय आकाश के समान विशाल थे- और इन सबमें श्रेष्ठ हैं रामकृष्ण। रामानुजन, शंकर इत्यादि संकीर्ण हृदय वाले केवल पंडित मालूम होते हैं। वह प्रेम कहां है-वह हृदय जो दूसरों का दुःख देखकर द्रवित हो? पंडितों
170 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
का शुष्क विद्याभिमान और जैसे-जैसे केवल अपने आपको मुक्त करने की इच्छा परन्तु महाशय क्या यह सम्भव है? क्या इसकी कभी सम्भावना थी या हो सकती है? क्या
नानक, कबीर आदि सच्चे अवतार हैं, क्योंकि उनके हृदय आकाश के समान विशाल थे- और इन सबमें श्रेष्ठ हैं रामकृष्ण। रामानुजन, शंकर इत्यादि संकीर्ण हृदय वाले केवल पंडित मालूम होते हैं। वह प्रेम कहां है-वह हृदय जो दूसरों का दुःख देखकर द्रवित हो? पंडितों
170 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
का शुष्क विद्याभिमान और जैसे-जैसे केवल अपने आपको मुक्त करने की इच्छा परन्तु महाशय क्या यह सम्भव है? क्या इसकी कभी सम्भावना थी या हो सकती है? क्या