क्योंकि मेरा कल्याण उसी में है।
‘‘एक और सत्य, जिसका मैंने अुनभव किया है, वह यह है कि निःस्वार्थ सेवा ही धर्म है और ब्रह्य विधि, अनुष्ठान आदि केवल पागलपन है। यहां तक कि अपनी मुक्ति की अभिलाषा करना भी अनुचित है। मुक्ति केवल उसके लिए है जो दूसरों के लिए सर्वस्थ त्याग देता है, परन्तु वे लोग जो ‘मेरी मुक्ति’ की अहर्निश रट लगाए
171 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
रहते हैं, वह अपना वर्तमान और भावी वास्तविकता कल्याण नष्ट कर
क्योंकि मेरा कल्याण उसी में है।
‘‘एक और सत्य, जिसका मैंने अुनभव किया है, वह यह है कि निःस्वार्थ सेवा ही धर्म है और ब्रह्य विधि, अनुष्ठान आदि केवल पागलपन है। यहां तक कि अपनी मुक्ति की अभिलाषा करना भी अनुचित है। मुक्ति केवल उसके लिए है जो दूसरों के लिए सर्वस्थ त्याग देता है, परन्तु वे लोग जो ‘मेरी मुक्ति’ की अहर्निश रट लगाए
171 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
रहते हैं, वह अपना वर्तमान और भावी वास्तविकता कल्याण नष्ट कर