योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उत्पीड़ित जनता को जगाने, उठाने और आगे बढ़ाने का प्राणान्तप्रण ले रखा था। उनके लिए ज्ञान का अर्थ निर्जीव तथा शुष्क विद्वता बघारना नहीं, बल्कि राष्ट्र की तत्कालीन ज्वलंत समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करना था। उनके सम्मुख जं़जीरों में जकड़ी भारत माता थी और था राष्ट्र का अधःपतन, जिसे देख उन्होंने आठ-आठ आंसु बहाये थे। राष्ट्र से जुड़कर विवेकानन्द इतिहास से जुड गए थे। इससे उनकी विचारधारा का और व्यक्तित्व का निरन्तर विकास तेज़ी से हुआ था। 26 दिसम्बर,


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उत्पीड़ित जनता को जगाने, उठाने और आगे बढ़ाने का प्राणान्तप्रण ले रखा था। उनके लिए ज्ञान का अर्थ निर्जीव तथा शुष्क विद्वता बघारना नहीं, बल्कि राष्ट्र की तत्कालीन ज्वलंत समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करना था। उनके सम्मुख जं़जीरों में जकड़ी भारत माता थी और था राष्ट्र का अधःपतन, जिसे देख उन्होंने आठ-आठ आंसु बहाये थे। राष्ट्र से जुड़कर विवेकानन्द इतिहास से जुड गए थे। इससे उनकी विचारधारा का और व्यक्तित्व का निरन्तर विकास तेज़ी से हुआ था। 26 दिसम्बर,


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