क्या घिसने-मांजने से रूप उत्पन्न हो सकता है? क्या धरने-बांधने से प्रीति होती है? जो सदा ही भिखारी है उसके त्याग में क्या गौरव? जिसमें इन्द्रिय-बल न हो उसके इन्द्रिय-संयम में क्या गुण? जिसमें विचार का अभाव हो, हृदय का अभाव हो, उच्चभिलाषा का अभाव हो, जिसमें समाज कैसे बनता है, इस कल्पना का भी अभाव हो, उसका आत्म त्याग ही क्या हो सकता है? विधवा को बलपूर्वक सती करवाने में किस प्रकार से सतीत्व का विकास दिखाई पड़ता है? कुसंस्कारों
क्या घिसने-मांजने से रूप उत्पन्न हो सकता है? क्या धरने-बांधने से प्रीति होती है? जो सदा ही भिखारी है उसके त्याग में क्या गौरव? जिसमें इन्द्रिय-बल न हो उसके इन्द्रिय-संयम में क्या गुण? जिसमें विचार का अभाव हो, हृदय का अभाव हो, उच्चभिलाषा का अभाव हो, जिसमें समाज कैसे बनता है, इस कल्पना का भी अभाव हो, उसका आत्म त्याग ही क्या हो सकता है? विधवा को बलपूर्वक सती करवाने में किस प्रकार से सतीत्व का विकास दिखाई पड़ता है? कुसंस्कारों