की शिक्षा देकर लोगों से पुण्य कर्म क्यों कराते हो? मैं कहता हूं कि मुक्त करो, जहां तक हो सके लोगों के बन्धन खोल दिए जाएं। क्या कीचड़ से कीचड़ धोया जा सकता है? क्या बन्धन को बन्धन से हटा सकते हो? ऐसा उदाहरण कहां?’’
फिर वेदान्त दर्शन की चर्चा के बाद अन्त में लिखा है:
‘‘सप्रेम सकाम उपासना पहले आती है। छोटे की उपासना से आरम्भ करो, बड़े की उपासना स्वयं आ जाएगी।
‘‘मां! तुम चिंतित मत हो। प्रबल वायु बड़े वृक्षों से ही टकराती
की शिक्षा देकर लोगों से पुण्य कर्म क्यों कराते हो? मैं कहता हूं कि मुक्त करो, जहां तक हो सके लोगों के बन्धन खोल दिए जाएं। क्या कीचड़ से कीचड़ धोया जा सकता है? क्या बन्धन को बन्धन से हटा सकते हो? ऐसा उदाहरण कहां?’’
फिर वेदान्त दर्शन की चर्चा के बाद अन्त में लिखा है:
‘‘सप्रेम सकाम उपासना पहले आती है। छोटे की उपासना से आरम्भ करो, बड़े की उपासना स्वयं आ जाएगी।
‘‘मां! तुम चिंतित मत हो। प्रबल वायु बड़े वृक्षों से ही टकराती