योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

है। ‘अग्नि को कुरेदने से वह अधिक प्रज्वलित होती है।’ ‘सांप मारने से फन उठाता है’ इत्यादि। जब हृदय में पीड़ा उठती है, जब शोक की आंधी चारों ओर से घेर लेती है, जब मालूम होता है कि प्रकाश फिर कभी न होगा, जब आशा और साहस का प्रायः लोप हो जाता है, तब इस भयंकर आध्यात्मिक तुफान में ब्रह्य की अंतःज्योति चमक उठती है। वैभव की गोद में पला हुआ फूलों में पोसा हुआ, जिसने कभी एक आंसु भी नहीं बहाया, क्या ऐसा कोई व्यक्ति कभी बड़ा हुआ है?


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है। ‘अग्नि को कुरेदने से वह अधिक प्रज्वलित होती है।’ ‘सांप मारने से फन उठाता है’ इत्यादि। जब हृदय में पीड़ा उठती है, जब शोक की आंधी चारों ओर से घेर लेती है, जब मालूम होता है कि प्रकाश फिर कभी न होगा, जब आशा और साहस का प्रायः लोप हो जाता है, तब इस भयंकर आध्यात्मिक तुफान में ब्रह्य की अंतःज्योति चमक उठती है। वैभव की गोद में पला हुआ फूलों में पोसा हुआ, जिसने कभी एक आंसु भी नहीं बहाया, क्या ऐसा कोई व्यक्ति कभी बड़ा हुआ है?


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