‘‘आर्य बाबा का दम भरते हुए चाहे प्राचीन भारत का गौरवगान दिन-रात करते रहो और कितना भी ‘डम-डम’ कहकर गाल बजाओ, तुम ऊंची जाति वाले क्या जीवित हो? तुम लोग हो दस हज़ार वर्ष पीछे के ममी! जिन्हें ‘सचल श्मशान’ कहकर तुम्हारे पूर्व पुरूषों ने घृणा की है। भारत में जो कुछ वर्तमान जीवन है, वह उन्हीं में है और ‘सचल श्मशान’ हो तुम लोग। तुम्हारे घर-द्वार म्यूज़ियम हैं, तुम्हारे आचार-व्यवहार, चाल-चलन देखने से जान पड़ता है, बड़ी दीदी के मुंह
‘‘आर्य बाबा का दम भरते हुए चाहे प्राचीन भारत का गौरवगान दिन-रात करते रहो और कितना भी ‘डम-डम’ कहकर गाल बजाओ, तुम ऊंची जाति वाले क्या जीवित हो? तुम लोग हो दस हज़ार वर्ष पीछे के ममी! जिन्हें ‘सचल श्मशान’ कहकर तुम्हारे पूर्व पुरूषों ने घृणा की है। भारत में जो कुछ वर्तमान जीवन है, वह उन्हीं में है और ‘सचल श्मशान’ हो तुम लोग। तुम्हारे घर-द्वार म्यूज़ियम हैं, तुम्हारे आचार-व्यवहार, चाल-चलन देखने से जान पड़ता है, बड़ी दीदी के मुंह