रोम, वेनिस, जिनेवा, बगदाद,समरकंद, स्पेन, पोर्तुगाल, फ्रांसिसी, दिनेमार, डच और अंग्रेज़ी का क्रमान्वय से आधिपत्य हुआ और उनको ऐश्वर्य मिला है। और तुम? कौन सोचता है इस बात को! स्वामी जी! तुम्हारे पितृ पुरूष दो दर्शन लिख गए हैं, दस काव्य तैयार कर गए हैं, इस मन्दिर उठवा गए हैं और तुम्हारी बुलंद आवाज़ से आकाश फट रहा है, और जिनके रूधिर-óाव से मनुष्य जाति की यह जो कुछ उन्नति हुई है, उनके गुणों का गान कौन करता है? लोकजयी धर्मवीर,
रोम, वेनिस, जिनेवा, बगदाद,समरकंद, स्पेन, पोर्तुगाल, फ्रांसिसी, दिनेमार, डच और अंग्रेज़ी का क्रमान्वय से आधिपत्य हुआ और उनको ऐश्वर्य मिला है। और तुम? कौन सोचता है इस बात को! स्वामी जी! तुम्हारे पितृ पुरूष दो दर्शन लिख गए हैं, दस काव्य तैयार कर गए हैं, इस मन्दिर उठवा गए हैं और तुम्हारी बुलंद आवाज़ से आकाश फट रहा है, और जिनके रूधिर-óाव से मनुष्य जाति की यह जो कुछ उन्नति हुई है, उनके गुणों का गान कौन करता है? लोकजयी धर्मवीर,