कि यदि उनकी गुड़ियों को हृदय से प्यार किया जाए तो वे जीवित हो उठेंगी। जापानी बालिका
175 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
अपनी गुड़िया को कभी नहीं तोड़ती। हे महाभागे ! मेरा भी विश्वास है कि यदि हत्श्री, अभागे, निर्बुद्वि पददलित, चिरबुभुक्षित, झगड़ालू और ईष्यालू भारतवासियों को भी कोई हृदय से प्यार करने लगे तो भारत पुनः जाग्रत हो जाएगा। भारत तभी जागेगा जब विशाल हृदय वाले सैकड़ों स्त्री-पुरूष भोग-विलास और सुख की सभी इच्छाओं को विसर्जित कर मन,
कि यदि उनकी गुड़ियों को हृदय से प्यार किया जाए तो वे जीवित हो उठेंगी। जापानी बालिका
175 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
अपनी गुड़िया को कभी नहीं तोड़ती। हे महाभागे ! मेरा भी विश्वास है कि यदि हत्श्री, अभागे, निर्बुद्वि पददलित, चिरबुभुक्षित, झगड़ालू और ईष्यालू भारतवासियों को भी कोई हृदय से प्यार करने लगे तो भारत पुनः जाग्रत हो जाएगा। भारत तभी जागेगा जब विशाल हृदय वाले सैकड़ों स्त्री-पुरूष भोग-विलास और सुख की सभी इच्छाओं को विसर्जित कर मन,