योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



‘‘यह ठीक है कि वोट, बैलट आदि द्वारा प्रजा को एक प्रकार की जो शिक्षा मिलती है, उसे हम नहीं पाते, किन्तु राजनीति के नाम पर चोरों का दल देशवासियों का रक्त चूसकर समस्त यूरोपीय देशों का नाश करता है और स्वयं मोटा-ताजा बनता है, वह दल भी हमारे देश में नहीं है। घूस की वह धूम, वह दिन दहाड़े लूट, जो पाश्चात्य देशों में होती है, यदि भारत में दिखाई पड़े तो हताश होना पड़ेगा।’’

घर की जोरू बर्तन मांजे, गणिका लड्डू खाय।

गली-गली है गोरस फिरता, मदिरा बैठ बिकाय। ।


878 of 1197



‘‘यह ठीक है कि वोट, बैलट आदि द्वारा प्रजा को एक प्रकार की जो शिक्षा मिलती है, उसे हम नहीं पाते, किन्तु राजनीति के नाम पर चोरों का दल देशवासियों का रक्त चूसकर समस्त यूरोपीय देशों का नाश करता है और स्वयं मोटा-ताजा बनता है, वह दल भी हमारे देश में नहीं है। घूस की वह धूम, वह दिन दहाड़े लूट, जो पाश्चात्य देशों में होती है, यदि भारत में दिखाई पड़े तो हताश होना पड़ेगा।’’

घर की जोरू बर्तन मांजे, गणिका लड्डू खाय।

गली-गली है गोरस फिरता, मदिरा बैठ बिकाय। ।


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