योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



‘‘जिनके हाथ में रूपया है, वे राज्यशासन को अपनी मुठ्ठी में रखते हैं, प्रजा को लूटते हैं और उसको चूसते हैं, उसके बाद उन्हें सिपाही बनाकर देश-देशान्तरों में मरने के लिए भेज देते हैं, जीत होने पर उन्हीं का घर धन-धान्य से भरा जाएगा, किन्तु प्रजा तो उसी जगह मार डाली गई। तुम घबराओ नहीं, आश्चर्य भी मत प्रकट करो।

‘‘एक बात पर विचार कर देखो, मनुष्य नियमों को बनाता है या नियम मनुष्यों को बनाते हैं? मनुष्य रूपया पैदा करता है या


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‘‘जिनके हाथ में रूपया है, वे राज्यशासन को अपनी मुठ्ठी में रखते हैं, प्रजा को लूटते हैं और उसको चूसते हैं, उसके बाद उन्हें सिपाही बनाकर देश-देशान्तरों में मरने के लिए भेज देते हैं, जीत होने पर उन्हीं का घर धन-धान्य से भरा जाएगा, किन्तु प्रजा तो उसी जगह मार डाली गई। तुम घबराओ नहीं, आश्चर्य भी मत प्रकट करो।

‘‘एक बात पर विचार कर देखो, मनुष्य नियमों को बनाता है या नियम मनुष्यों को बनाते हैं? मनुष्य रूपया पैदा करता है या


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